बहुत दूर है मंज़िल | हिंदी कविता

बहुत दूर है मंज़िल | हिंदी कविता

बहुत दूर है मंज़िल Bahut Dur hai Manzil Banner

बहुत दूर है मंज़िल
है भी या नहीं
पता नहीं
बड़ी कठिन है डगर
चलते चलते थक तो ना जाओगे?
क्यों मख़मल से उतर
कंकड़ को गले लगाओगे
बहुत दूर है मंज़िल…

मीलों लम्बा है रास्ता
कहीं बीच में थक तो ना जाओगे? 
दिल भर गया जो मुझसे
तो कैसे साथ निभाओगे?
बहुत दूर है मंज़िल…

कितने दिन ऐसे गुज़रेंगे
ना अन्न होगा ना पानी
ऐसे कितने दिन बिताओगे?
प्यार की रोटी से 
कब तक भूख मिटाओगे?
आख़िर कभी तो भूख लगेगी
कब तक ऐसे रह पाओगे?
बहुत दूर है मंज़िल…

कहीं धूप है कहीं छाँव
कहीं छाले हैं कहीं आराम
सुख की चादर छोड़
क्या दुःख की नींद सो पाओगे?
क्या अपने सुरक्षित भविष्य को
ख़ुद आग लगाओगे?
बहुत दूर है मंज़िल…

इन नन्हे मीठे गुलगुलों से 
ममता का दामन कैसे छुड़ाओगे?
प्यार के आगे
उनकी फ़िक्र को कैसे छुपाओगे
रात में उन्हें कम्बल कैसे उढ़ाओगे?
बहुत दूर है मंज़िल…

जो ये आज तुम्हें देवता दिखता है
कल को उसके अंदर का
हैवान जब बाहर आएगा
तो उसके साथ जी पाओगे?
बहुत दूर है मंज़िल…

सवालों के शोर में 
क्या खुद की आवाज़ सुन पाओगे?
कटाक्ष के बवंडरों में 
पंख फैला उड़ पाओगे?
बहुत दूर है मंज़िल…

तिनका तिनका जोड़ कर
जो ये सुन्दर सा घोंसला बनाया है
क्या उसे छोड़ कर 
सिर्फ़ एक तिनके के भरोसे जी पाओगे?
बहुत दूर है मंज़िल…

मानस ‘समीर’ मुकुल

I would love to hear your feedback on this poem. Do share in the comments section. You can read other poems here.

If you love my poetry I recently published my first Poetry book – ‘You, Me & The Universe’ – Poems on the Conspiracies of the Universe. You can order the book and find more details HERE

Banner Picture Credit – Photo by Gabriel on Unsplash

You may also like...

14 Responses

  1. बहुत कुछ कह भी दिया और बहुत कुछ शब्दों ने ना कह के भी बोल दिया। बहुत खूबसूरत रचना।
    बहुत दूर है मंजिल…

  2. Tarang says:

    सवालों के शोर में
    क्या खुद की आवाज़ सुन पाओगे?
    कटाक्ष के बवंडरों में
    पंख फैला उड़ पाओगे?
    बहुत दूर है मंज़िल…

    Beautiful composition. Poignant and so expressive.

  3. I loved the grey shades that this poem carries within. highlighting the realities , questioning the very essence of existence of an emotion through hardships. Very well presented. I loved it !

  4. Lovely poem focusing on dream and reality, something that becomes difficult to choose from. Achi hai.

  5. Rashi Roy says:

    Bahot badhiya, hamesha ki tarah. Took me a while to get into the depth of it and understand. The truth written so effortlessly and will leave the readers with so many questions to ponder. Keep up the great work.

  6. Swati Khatri says:

    Beautiful expressions which narrate so beautifully about both the sides of a dream

    • Manas Mukul says:

      Thank you so much again. Means a lot. Keep visiting. Do check out the others. Feedback awaited.

Love your feedback!

%d bloggers like this: