Tagged: Hindi poetry

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बचपन का घर

बचपन का घर – ये न ही कविता है न ही गद्य, पर कुछ है, जिसमें मैं अपने बचपन को तलाशता हुआ अपने बचपन के घर जाता हूँ

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आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा | हिंदी कविता

आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा | हिंदी कविता – मानस मुकुल
क्या होता है जब मन रेत हुआ जा रहा होता
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