एक भविष्य और ख़त्म हुआ

एक भविष्य और ख़त्म हुआ… | A migrant girl kept walking for hundreds of miles and died just before reaching her home. That suffocating pain is the reason for this poem.

एक भविष्य और ख़त्म हुआ banner

मीलों तक चलते चलते,
आज एक भविष्य और ख़त्म हुआ,

क्या भविष्य सिर्फ अमीरों के बच्चों का होता है?
उनकी शक्ल जरूर अलग है पर उनका धर्म एक होता है…

कोई छप्पन भोग में नमक चख रहा,
और कोई आंसुओं में ढूंढ रहा,
मौत उस बच्ची की नहीं हुयी
मर हमारे अंदर कुछ रहा.

आख़िर तुम भी तो किसी की माँ हो,
तुम भी तो किसी के बाप हो,
एक महामारी हमें क्या मारेगी,
हमारी सोच की सड़ांध महसूस करके,
खुद मर जाएगी.

कल एक मरा,
आज दो मरे,
ये ही गिनती करते रह जायेंगे,
और हम इस खबरों को बदल बदल,
तिच तिच करते रह जायेंगे.

अमीरों को लगता है की गरीब,
पैदा ही इसके लिए हुआ है,
मगर धीरे धीरे करके
एक ऐसा दिन भी आएगा,
जब सब ख़त्म हो जायेगा.

किसी को ये कष्ट है की उसके पास खमीर नहीं,
और किसी ने अन्न को बहुत दिनों से देखा नहीं,
क्या कलयुग में भी कोई कृष्ण आएंगे,
जो एक अन्न के दाने से गरीबों की भूक मिटायेंगे.

उसने कितने अमीरों का घर बनाया,
उसने कितनों का घर सजाया,
पर उसे तो ना अन्न मिला ना पानी,
ये ही है उस अभागे गरीब की कहानी.

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धन भी उसका, हक़ भी उसका,
अन्न भी उसका, खेत भी उसका,
कितनी वीभत्स्य है शक्ल अमीरी की,
यही पहचान है उसकी ज़मीरी की.

ना कुछ बदला है,
ना कुछ बदलेगा,
बस अमीर और अमीर,
गरीब और गरीब होता रहेगा.

सदियों से सोते रहे हैं,
सदियों तक सोते रह जायेंगे,
ना जाने कितने भविष्य सड़कों पर
चलते चलते यूँही ख़त्म हो जायेंगे.

मानस ‘समीर’ मुकुल

“I’m taking my blog to the next level with Blogchatter’s My Friend Alexa – #MyFriendAlexa.” 

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12 Responses

  1. Monika says:

    Beautifully expressed …..full of emotions….really Kalyuga needs another Krishna …….

  2. Ruchi says:

    Very touching ! Don’t know why we have become so thick skinned

  3. Speechless…
    Beautifully weaved with strong words.
    कोई नमक चख रहा कोई आंसू में ढूंढ रहा
    किसी के पास खमीर नहीं किसी ने अन्न को देखा नहीं
    All words and lines were not allowing me to move ahead.
    it’s really a strong poem and very well expressed.
    सच में ना जाने कितने भविष्य ऐसे खो जाएंगे

    • Manas Mukul says:

      Thank you for supporting and appreciating. It really means a lot… You have been truly encouraging 😊🤗👍🏼

  4. soniadogra says:

    Inequality is a bitter truth and I fear it shall never be done away with. Your Alexa campaign has brought out some hard hitting truths Manas. Keep it up.

    • Manas Mukul says:

      Thank you so much Sonia ji for reading and motivating on all of them. They literally kept me going and egged me to write more and more. Dil se thanks 😊👍🏼🤗

  5. Jyoti Jha says:

    “कोई छप्पन भोग में नमक चख रहा,
    और कोई आंसुओं में ढूंढ रहा”, मन को झकझोर कर रख देने वाले भाव को शब्दों में बेहद खूबसूरती से पिरोया है मानसजी ।

    • Manas Mukul says:

      Thank you so much for the appreciation Jyoti. Apne sab poems padhi alexa wali uske liye dil se shukriya. Means a lot.

  6. Nimoli says:

    I am stunned! How talented are you Manas👏👏👏
    I am dumbstruck reading this poem, so beautifully and deeply expressed👌

    • Manas Mukul says:

      Thank you thank you thank you. You taking out time and reading this out of the food group is a welcome gift for me. Heartfelt gratitude 😊🤗

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