आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा | हिंदी कविता

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आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा - हिंदी कविता Banner

आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा
बहती हवा में क्यों ढेर हुआ जा रहा

समन्दरों की तरह क्यों खारा हुआ जा रहा
आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा

समय की टिक-टिक सा निरंतर चला जा रहा
फिर भी शांत झील सा स्थिर नज़र आ रहा 

तपिश से भरी आग हुआ जा रहा 
आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा

इतनी भीड़ में क्यों अकेला हुआ जा रहा,
पतझड़ में भी क्यों छाँव दिए जा रहा

प्रत्यक्ष होकर भी अदृश्य हुआ जा रहा
आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा

कभी पानी कभी बर्फ़ हुआ जा रहा 
कभी कराहता सा दर्द हुआ जा रहा 

चिक्की में घुली शक्कर हुआ जा रहा 
आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा

बरसाती बादलों में इंद्रधनुष सा छा रहा 
और कोरे कागज़ सा श्वेत हुआ जा रहा

अनगिनत सवालों की आँधी हुआ जा रहा  
आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा

जीत के पराक्रमी ध्वज सा लहरा रहा 
और मुड़ा तो हार की समाधी हुआ जा रहा 

कहीं भी उगती पीपल की जड़ हुआ जा रहा 
आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा

आवारा समीर सा भटकता हुआ जा रहा 
गौतम बन बुद्ध हुआ जा रहा

आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा
आख़िर ये मन क्यों रेत हुआ जा रहा

मानस मुकुल

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10 Responses

  1. Radhika says:

    So soothing n so true..
    Na jaane ye Mann kyu itna behchain hain
    Na Japanese Kiski talash h is ko
    Sab yahi toh hain aas pass
    Fir bhi ye Mann, ret hua ja raha hain!

    • Manas Mukul says:

      Thank you so much Radhika ji for the appreciation. Lovely lines. Means a lot. Thanks again. 😊👍🏽🙏🏽

  2. Rashi Roy says:

    Bahot sundar likha hai. It already sounds like a song to me. Aapke aawaz mein recitation ho jaye to chaar chand lag jaye!

  3. So beautiful and deep meaning. keep going manas. 👍

  4. Archana says:

    “jeet ke prakrami dhwaj sa lehra raha aur muda to haar ki samdhi hua ja raha” wah ek aur Atayant sunder aapki rachana👌dil ko chhu gayi.

    • Manas Mukul says:

      Bahut shukriya Archana ji hamesha ki protsahan dene ke liye. Dhanyawad 😊🤗👍🏽🙏🏽

  5. Mann kis Manzil chala ye samjh nahi aata hai,
    Na jane kyu sawaal kiye jata hai…
    Aakhir ye mann kyu ret hua jata hai…

    Lovely compostion, Loved the words and depth of poem. More power to your pen.

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